टेस्ला ने आखिरकार भारतीय बाजार में कदम रख दिया है, लेकिन इसकी कीमतें सुनकर लोगों के होश उड़ गए हैं। एक ऐसी इलेक्ट्रिक कार, जो अमेरिका में 30 लाख रुपये में मिलती है, वही भारत में 60 से 70 लाख में बिक रही है। क्या यह सिर्फ ब्रांड का असर है? नहीं, असली वजह है — भारी टैक्स सिस्टम!
60 लाख की कार पर 100% से ज्यादा टैक्स!
टेस्ला मॉडल Y, जो अमेरिका में करीब 71,000 डॉलर (लगभग 60 लाख रुपये) में मिलती है, भारत में टैक्स के बाद लगभग 61 लाख रुपये से शुरू होती है। इसका कारण है भारत में लागू होने वाले कई प्रकार के टैक्स:
- इंपोर्ट ड्यूटी: 70% से 100%
- GST (वस्तु एवं सेवा कर): 28%
- सेस और अन्य चार्जेज: 10% तक
यानि अगर टेस्ला की मूल कीमत 27 लाख रुपये है, तो भारत में टैक्स और शुल्क मिलाकर यह 60 लाख से भी ऊपर पहुंच जाती है।सोशल मीडिया पर लोग इसे मज़ाक में "Tax-la" कहकर बुला रहे हैं — टैक्स और टेस्ला का कॉम्बो!
क्या भारत सरकार टेस्ला के लिए टैक्स कम करेगी?
मार्च 2024 में भारत सरकार ने एक नई ईवी पॉलिसी की घोषणा की थी, जिसके तहत:
- टेस्ला जैसी कंपनियों को सिर्फ 15% इंपोर्ट ड्यूटी का फायदा मिल सकता है,
- बशर्ते वे 4,150 करोड़ रुपये का निवेश करें,
- और 3 साल में भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शुरू करें।
अगर टेस्ला ये शर्तें मान लेती है, तो भारत में मॉडल 3 जैसे कार की कीमत 35 से 40 लाख रुपये तक आ सकती है। लेकिन अभी तक टेस्ला ने भारत में मैन्युफैक्चरिंग शुरू नहीं की है, इसलिए अभी भी पुराने टैक्स रेट लागू हो रहे हैं।
स्थानीय कंपनियों को डर क्यों लग रहा है?
टाटा, महिंद्रा जैसी भारतीय ईवी कंपनियां इस बात से चिंतित हैं कि अगर सरकार टेस्ला को टैक्स में छूट दे देती है, तो:
- विदेशी कंपनियों को फायदा होगा,
- भारतीय कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी घट सकती है,
- और लोकल मैन्युफैक्चरिंग को नुकसान हो सकता है।
- इसलिए ये कंपनियां टैक्स छूट का विरोध कर रही हैं।
क्या टेस्ला भारत में आम आदमी की कार बन पाएगी?
एलन मस्क खुद कह चुके हैं कि भारत में टैक्स दरें दुनिया में सबसे ज्यादा हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि टेस्ला भारत में 25 लाख रुपये से कम कीमत वाली कार लॉन्च कर सकती है। लेकिन इसके लिए स्थानीय उत्पादन जरूरी होगा।सवाल ये है:क्या टेस्ला भारत में फैक्ट्री लगाएगी?या फिर टेस्ला सिर्फ अमीरों की कार बनी रहेगी?









